इतिहास और उपलब्धियां

सीएसआईआर-सीरी ने इलेक्ट्रॉनिकी और संबद्ध विज्ञान और इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट सामाजिक और सामरिक प्रभाव वाले माइक्रोवेव उपकरणों, सेंसर प्रौद्योगिकियों, वीएलएसआई डिजाइन और एंबेडेड सिस्टम में अपने महत्वपूर्ण योगदान द्वारा विशिष्ट स्थान हासिल किया है।

यह महत्वपूर्ण है कि 70 वर्षों की मूल्यांकन (2012 में) अवधि के दौरान व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य शीर्ष 70 सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों में से, सीएसआईआर-सीरी,सीएसआईआर-आईआईपी सहित निम्नलिखित 8 प्रौद्योगिकियों के साथ पहले स्थान पर है।

  1. डीजल वैद्युत इंजनों के लिए उद्दीपन नियंत्रण प्रणाली –देशभर में आवाजाही को सहज बनाना।
  2. चीनी उद्योग के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंटेशन –खाद्य चीनी की मिठास के लिए।
  3. ब्लूएएम4 वैद्युत इंजनों के लिए 150 KVA के एकल फेज से तीन फेज थायरिस्टर कन्वर्टर- भारतीय रेलवे को शक्तिशाली बनाने के लिए।
  4. हाई पावर एस-बैंड क्लाइस्ट्रॉन-कोर सामरिक प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय आधारिक संरचना का सृजन।
  5. विद्युत यांत्रिक एक्चुएटर्स के लिए पीडब्लूएम एम्पलीफायर और इलेक्ट्रॉनिक्स- सामरिक अन्तर्जलीय वाहनों (अंडरवाटर वेहिकल) के लिए गहन प्रौद्योगिकी प्रदान करना।
  6. सी-बैंड 60 डब्ल्यू अंतरिक्ष चल तरंग नलिका-देश के सामरिक हितों की रक्षा।
  7. मेम्स ध्वनि संवेदक – सामरिक क्षेत्र का सहयोग।
  8. परमाणु ऊर्जा विभाग के लिए मेग्नेट्रॉन – डीएई के त्वरित्र (एक्सलेटर) कार्यक्रमों में तेजी लाना।

20 वीं शताब्दी के अंतिम दो दशकों के दौरान, सीरी ने राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का भी विकास किया:

  1. स्रॉस और इनसैट श्रृंखला के उपग्रह के लिए संकर सूक्ष्मपरिपथ।
  2. संस्थान ने पहली मेटल ऑक्साइड सेमीकंडक्टर लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट या एलएसआई चिप, 16-बिट प्रोसेसर चिप, पहली एएसआईसी चिप विकसित की जिसे मैसर्स सी-डॉट के डिजिटल टेलीफोन एक्सचेंजों में इस्तेमाल किया गया।
  3. एएसआईपी डिजाइन को दुनिया में पहली बार हिंदी में पाठ से भाषण (टेक्स्ट टू स्पीच) संश्लेषण के लिए विकसित किया गया।
  4. एमसी-68010 माइक्रोप्रोसेसर का समतुल्य डिजाइन किया गया।

नई सहस्राब्दी में, सीरी ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं का विस्तार किया है और सूक्ष्मतरंग नलिका प्रौद्योगिकियों और सामरिक सूक्ष्मतरंग नलिका, विशेषतः उच्च दक्षता और उच्च विश्वसनीयता के उच्च शक्ति वाले सूक्ष्मतरंग नलिका के डिजाइन और विकास के क्षेत्र में बड़ी पहल की है। इन क्षेत्रों की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नानुसार हैं:

  • इसरो को सीएसआईआर-सीरी ने अंतरिक्ष-मानकों पर खरी सी-बैंड स्पेस-टीडब्ल्यूटी (अपनी तरह का पहला) सफलतापूर्वक डिलीवर की है और यह एकमात्र शोध एवं विकास प्रयोगशाला है जो अंतरिक्ष टीडब्लूटी के स्वदेशी डिजाइन और विकास में शोधरत है। हाल ही में, सीएसआईआर-सीरी ने केयू-बैंड 100 डब्ल्यू स्पेस टीडब्ल्यूटी भी डिलीवर किया है और भविष्य के इंटेलिजेंट उपग्रह संचार के लिए आवश्यक उच्च आवृत्ति रेंज के अत्याधुनिक स्पेस टीडब्ल्यूटी के विकास के लिए इसरो के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। स्वदेशी प्रौद्योगिकी भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम के लिए वरदान सिद्ध होगी।
  • जायरोट्रॉन, नियंत्रित ताप नाभिकीय संलयन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटकों में से एक है, जो बहुत ही उच्च शक्ति का मिलीमीटर तरंग स्रोत होता है, जिसका शुभारंभ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय ताप नाभिकीय प्रायौगिक रिएक्टर (आईटीईआर) के माध्यम से हुआ है। भारत वर्ष 2005 में इस गतिविधि में शामिल हुआ। सीरी के नेतृत्व वाले पांच संस्थानों के सहसंघ (कंसोर्टियम) ने देश का पहला जायरोट्रॉन डिजाइन और विकसित किया है, जो एक उन्नत सूक्ष्मतरंग नलिका है, जिसकी शक्ति 42 गीगाहर्ट्ज़ पर 200 किलोवोल्ट होती है, जिसका अनुप्रयोग इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च (आईपीआर, गांधीनगर) में न्यूक्लियर फ्यूजन पावर रिसर्च के लिए किया जाता है। भारत अब इस तरह की प्रौद्योगिकी से लैस पांच देशों के विशिष्ट समूह (एलीट क्लब) में शामिल हो गया है।
  • सीएसआईआर-सीरी ने मेडिकल लाइनेक्स के लिए एस-बैंड उच्च शक्ति स्पंदित मेग्नेट्रॉन (2 मेगावाट और 3 मेगावाट) में, कण त्वरित्र अनुप्रयोगों (पार्टिकल एक्सलेरेटर्स एप्लिकेशन) के लिए 6 मेगावाट पीक एस-बैंड क्लायस्ट्रॉन और 25 किलोवोल्ट/1 किलोएम्पियर और 40 किलोवोल्ट/3 किलोएम्पियर थायराट्रॉन भी विकसित किया है, और इसे क्रमशः समीर और डीएई को सफलतापूर्वक डिलीवर किया है।

इसके साथ ही, मेम्स, माइक्रो-सेंसर्स और असिलिकॉन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास के प्रयास शुरू किए गए। इन क्षेत्रों की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नानुसार हैं:

  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र-इसरो के लिए मेम्स -आधारित ध्वनि संवेदक, जिनका उपयोग चंद्रयान मिशन में किया गया था और पीएसएलवी और जीएसएलवी जैसे उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों की स्थिति के मॉनिटरन में भी किया जाता है
  • अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र-इसरो के लिए C-,X-,ku-बैंड के आरएफ मेम्स स्विच
  • मेम्स जायरोस्कोप देश में पहली बार विकसित
  • भारत में पहली बार पीएच संवेदन के लिए इस्फेट युक्ति और चयनात्मक आयन संवेदन के लिए प्लेटफॉर्म विकसित किया गया और डीआरडीओ को डिलीवर किया गया
  • डीएई संगठनों के लिए सिलिकॉन कार्बाइड शॉटकी डायोड डिटेक्टर
  • डीएई संगठनों के लिए हीरा संसूचक प्रौद्योगिकी
  • पर्यावरण की निगरानी के लिए गैस संवेदक
  • डीआरडीओ के लिए एलटीसीसी आधारित सूक्ष्म गर्म प्लेटें (माइक्रो हॉट प्लेट्स)
  • गैलियम नाइट्राइड आधारित नीली एलईडी विनिर्माण की प्रौद्योगिकी को हमारे देश में पहली बार सफलतापूर्वक विकसित किया गया है
  • सौर लैंप के लिए गैलियम नाइट्राइड आधारित सफेद एलईडी भी विकसित किए गए हैं
  • डीएई द्वारा प्रायोजित मेम्स-आधारित अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर (सीएमयूटी) का डिजाइन, विकास और निर्माण

संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास समूह विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के विकास पर केंद्रित है। इस क्षेत्र की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नानुसार हैं:

  • सीएसआईआर-सीरी ने 3-फेज़ 5 एचपी सौर ऊर्जा आधारित गहरे कुएं का पंप ड्राइव (डीप वेल पंप ड्राइव) विकसित किया है जो आसानी से उपलब्ध मोटरों के अनुकूल है। यह पंप ड्राइव अन्य उत्पादों से बेहतर है और ग्रामीण अनुप्रयोगों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
  • सीएसआईआर-सीरी ने मिलावटी दूध के नमूनों का पता लगाने के लिए “क्षीर स्कैनर” विकसित किया है। यह कम लागत वाली, पोर्टेबल प्रणाली है, जिसका उद्देश्य शुद्ध और मिलावटी दूध के नमूने को अलग करना है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन ने “क्षीर स्कैनर” राष्ट्र को समर्पित किया। मेम्स और स्टार्ट-अप्स ने इस प्रौद्योगिकी को अपनाया है और इसके वाणिज्यिक उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं।
  • सीएसआईआर-सीरी ने हमारी सहयोगी प्रयोगशाला, सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई द्वारा विकसित औद्योगिक स्तर के आरओ प्लांटों के लिए पूर्ण इंस्ट्रूमेंटेशन और नियंत्रण प्रणाली डिजाइन और कार्यान्वित की है। सीरी परिसर में जनवरी 2009 से एक स्वचालित आरओ प्लांट प्रचालन में है। इसमें जल गुणवत्ता के ऑनलाइन मॉनिटरन और सुधार सहित इष्टतम कार्यनिष्पादन के लिए संयंत्र के विभिन्न उप-प्रणालियों जैसे पंप ड्राइव, झिल्ली और वाल्व को नियंत्रित करने के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली लगी है। राजस्थान के ग्रामीण इलाको में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए इसी तरह के संयंत्र लगाए गए हैं। संस्थान की यह पहल अनवरत रूप से जारी है।
  • सीएसआईआर-सीरी ने जनसाधारण को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नई प्लाज्मा-आधारित प्रौद्योगिकी विकसित की है, जो पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस को मारने के लिए उपयोग किए जाने वाले पारा-युक्त लैंप की जगह लेगी। जल शोधन के लिए विकसित प्लाज्मा आधारित यूवी लैंप दुनिया में पहली ऐसी पहल है और इसमें कई आकर्षक विशेषताएं होती हैं, जैसे फिलामेंट विहीन प्रकाश स्रोत, शून्य स्टार्ट-अप समय, व्यापक तरंगदैर्ध्य कवरेज, आसानी से मरम्मत योग्य, स्केलेबल आयाम और इसकी पानी की कीटाणुशोधन की दक्षता भी उच्चतर होती है। इस प्रौद्योगिकी द्वारा घरेलू जलशोधक प्रणालियों का व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है। इसके प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से मेम्स और स्टार्ट-अप वाणिज्यिक उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रेरित हुए हैं। इसके अलावा, कई स्टार्ट-अप सीरी के सहयोग से वायु शोधन हेतु इस प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अन्वेषण कर रहे हैं।
  • सीरी ने एसओसी (सिस्टम ऑन चिप) के लिए पूर्ण डिजाइन तैयार करने की क्षमता विकसित की है। सुरक्षित भाषण संचार के लिए एसओसी प्राप्ति के उन्नत चरण में है।
  • सीरी ने पानी में आर्सेनिक का पता लगाने के लिए हैंड हेल्ड स्पेक्ट्रो-फोटोमीटर के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है। सीरी द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों का उपयोग चाय उद्योग और पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक युक्तियों में भी होता है।