डॉ. एस. ए. अकबर मुख्य वैज्ञानिक, एरिया कोरडीनेटर

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EPBX: 2244

साइबर भौतिक प्रणालियाँ (सीपीएस) स्मार्ट नेटवर्क सिस्टम हैं जिनमें एम्बेडेड सेंसर, प्रोसेसर और एक्चुएटर्स होते हैं जिन्हें भौतिक दुनिया (मानव उपयोगकर्ताओं सहित) को समझने और संवाद करने तथा रियल टाइम में मदद करने, संरक्षा-संबंधी महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों में गारंटित कार्यनिष्पादन के लिए डिज़ाइन किया जाता है। सीपीएस प्रणालियों में, प्रणाली के “साइबर” और “भौतिक” तत्वों के संयुक्त व्यवहार महत्वपूर्ण होते हैं- कंप्यूटिंग, नियंत्रण, संवेदन और नेटवर्किंग प्रत्येक घटक में अच्छी तरह एकीकृत किए जा सकते हैं, और घटकों एवं प्रणालियों के कार्य सुरक्षित एवं अंतःप्रचालनीय होने चाहिए। सीपीएस, वर्तमान में प्रचलित इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), इंडस्ट्री 4.0, इंडस्ट्रियल इंटरनेट, मशीन-टु-मशीन (एम2एम), इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग, टी सेंसर (ट्रिलियन सेंसर) और द फॉग (जैसे क्लाउड, लेकिन भूतल के करीब) जैसी प्रचलित संकल्‍पनाओं से अच्छी तरह से संबद्ध होता है। ये सभी उस तकनीक की परिकल्पना को दर्शाते हैं जो हमारे भौतिक संसार को हमारी सूचना संसार से अच्छी तरह संबद्ध करते हैं। हमारे विचार में, “सीपीएस” शब्द इन सभी की तुलना में अधिक मूलभूत और टिकाऊ है, क्योंकि न तो यह सीधे कार्यान्वयन दृष्टिकोण (जैसे आईओटी में “इंटरनेट”) न ही विशेष अनुप्रयोगों (“जैसे उद्योग 4.0 में उद्योग) का संदर्भ देता है। यह साइबर और भौतिक दुनिया की इंजीनियरिंग परंपराओं के संयोजन की मूलभूत बौद्धिक समस्या पर ध्यान केंद्रित करता है। निम्नलिखित अनुप्रयोगों ने साइबर-भौतिक प्रणाली के विकास को गति प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाई है :-

कृषि

एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2050 तक वैश्विक 9 बिलियन को पार कर जाएगी। जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य के बारे में कुछ स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है। उत्पादन और खपत के बीच 50% तक खाद्य पदार्थों का क्षय हो जाता है। यह समय की मांग है कि खाद्यान्न, फाइबर, फ़ीड और जैव ईंधन उत्पन्न करने वाली हमारी कृषि प्रणालियां अधिक से अधिक स्मार्ट और फलोत्पदक बनें। भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक कृषि उत्पादों का उत्पादन करने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं, प्रक्रियाओं और प्रणालियों की आवश्यकता होगी जो टिकाऊ (आर्थिक, पर्यावरण और सामाजिक दृष्टि से) हों। हमारे पर्यावरण के फुटप्रिंट में सुधार और उच्च-कौशल मध्य-वर्गीय कार्यबल के लिए अवसर पैदा करते हुए सीपीएस प्रौद्योगिकियां पूरी मूल्य श्रृंखला में दक्षता बढ़ाने में योगदान देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

पानी का वितरण

जल वितरण का नेटवर्क सैकड़ों मील क्षेत्र में फैला है। सीपीएस प्रौद्योगिकियां जल संसाधनों के इष्टतम उपयोग और पानी की उचित गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए संवेदकों और स्मार्ट मीटरों द्वारा मांग आधारित कुशल और अनुकूली नियंत्रण और मॉनिटरन प्रदान कर सकती हैं।

भवन नियंत्रण

साइबर भौतिक प्रणालियों में हुई प्रगति से भवनों को नियंत्रित और संचालित करने के तरीके भी परिवर्तित हो रहे हैं। भवन प्रबंधन प्रणालियों को भवन अवसंरचनाओं (इन्फ्रास्ट्रक्चर), आंतरिक और बाह्य दोनों अवसंरचनाओं (जैसे – बिजली, परिवहन, पहली प्रतिक्रिया और कानून प्रवर्तन) के साथ पर्याप्त एकीकरण करके तेजी से नेटवर्क किया जाता है। इस प्रगति से संरक्षा, उपयोगिता और ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए नई संभावना सृजित होती है। सभी साइबर भौतिक प्रणालियों सहित, भवन नियंत्रण प्रणाली पर भी आंतरिक और बाह्य दोनों हमलों की आशंका बनी रहती है। भवन अवसंरचना और भवनों की साइबर सुरक्षा के एकीकरण के लिए सुनियोजित विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

रक्षा

सैन्य और राष्ट्रीय रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए जटिल, नेटवर्क प्रणाली का महत्व दिन-प्रतिदिन/लगातार बढ़ता जा रहा है। सीपीएस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी (i) अभियांत्रिकी प्रतिस्‍कंदी प्रणालियों (भरोसेमंद, अनुकूलनीय और सस्ती रक्षा प्रणालियों की डिजाइन और डिलीवरी में तेजी) और (ii) स्वायत्तता (सैन्य अभियानों को बढ़ाने के लिए स्वायत्त प्रणाली) के मूल होते हैं।

आपातकालीन प्रतिक्रिया

प्रतिवर्ष लगभग 700 आपदाएँ होती हैं, जिनका विश्वव्यापी प्रभाव $100 बिलियन प्रति वर्ष से अधिक होता है। अगली पीढ़ी के सार्वजनिक सुरक्षा संचार, सेंसर नेटवर्क, और प्रतिक्रिया रोबोटिक्स सहित सीपीएस प्रौद्योगिकियां आपातकालीन स्थिति में कार्रवाई करने वाले लोगों की स्थितिजन्य जागरूकता को नाटकीय रूप से बढ़ा सकती हैं और भूकंप, आग और बमबारी जैसी आपदाओं में प्रतिक्रिया को सहज बना देती हैं। सॉफ्टवेयर सक्षम प्रणालियाँ टिकाऊपन, मजबूती और लचीलेपन को विशिष्ट रूप से सहज बना देती हैं।

ऊर्जा

स्वच्छ नवीकरणीय विद्युत ऊर्जा संसाधन, जैसे – सौर और पवन ऊर्जा तथा प्लग-इन विद्युत वाहनों जैसे अभिनव उत्पाद में प्रगति की अपार संभावना है। अनिरंतर और अनिश्चित पवन एवं सौर स्रोतों तथा प्लग-इन युक्तियों के एकीकरण के लिए न केवल नए सेंसर, स्विच और मीटर की आवश्यकता होती है, बल्कि अनुकूलनीय, टिकाऊ, कुशल और कम लागत की विद्युत वितरण प्रणाली हेतु स्मार्ट ग्रिड की अवधारणा को साकार करने के लिए स्मार्ट बुनियादी ढांचे की भी आवश्यकता होती है। सीपीएस प्रौद्योगिकियां इस बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए आवश्यक हैं, इससे संसाधनों और सुविधाओं के अनुकूलन और प्रबंधन में सुविधा होती है। साथ ही उपभोक्ताओं को अपनी ऊर्जा खपत को नियंत्रित और प्रबंधित करने में सक्षम बनाती है।

बुद्धिमतापूर्ण (इंटेलिजेंट) विनिर्माण

इंडस्ट्री 4.0 विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में स्वचालन और डेटा विनिमय की मौजूदा प्रवृत्ति है। इंडस्ट्री 4.0 कथित रूप से “स्मार्ट फैक्टरी” का सृजन करता है। साइबर-भौतिक प्रणालियाँ मॉड्यूलर संरचना वाले स्मार्ट कारखानों के भीतर भौतिक प्रक्रियाओं का मॉनिटरन करती हैं, भौतिक दुनिया की आभासी प्रतिलिपि बनाती हैं और विकेंद्रीकृत निर्णय लेती हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर, साइबर-भौतिक प्रणालियाँ, वास्तविक समय में एक-दूसरे के साथ-साथ मनुष्यों के साथ भी संप्रेषण और सहयोग करती हैं और इंटरनेट ऑफ सर्विसेज के माध्यम से आंतरिक और अंतर-संगठनात्मक दोनों सेवाएँ प्रस्तुत की जाती हैं तथा मूल्य श्रृंखला के प्रतिभागियों द्वारा उपयोग की जाती हैं।

परिवहन

परिवहन अवसंरचना के प्रबंधन सहित हमारे परिवहन नेटवर्क की दक्षता और संरक्षा में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। सीपीएस प्रौद्योगिकियां संसाधनों के उप-इष्टतम उपयोग के कारण उत्पन्न (संभावित) बाधाओं और इस कारण होने वाली दुर्घटनाओं का उन्मूलन कर सकती हैं।

एम्बेडेड और इंटरनेट की दुनिया के समागम ने साइबर-भौतिक प्रणालियों (सीपीएस) की अवधारणा को जन्म दिया है। ये भौतिक वस्तुओं में एम्बेडेड, अंतःसंबंधित (इंटरनेट के माध्यम सहित) आईसीटी प्रणालियों (संवेदन, प्रवर्तन, कंप्यूटिंग, संचार, आदि) का संदर्भ देते हैं, और नागरिकों एवं विभिन्न व्यवसायों को नवीन अनुप्रयोगों और सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं। ये उदीयमान इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और स्मार्ट सेंसरों का दोहन करने के साथ-साथ इंटेलिजेंट एवं स्वायत्त प्रणालियों के नवाचार को प्रोत्साहित भी करते हैं।

औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्रों में मांगों में वृद्धि के कारण एम्बेडेड आईसीटी का वर्तमान बाजार बढ़कर अगले पांच वर्षों में 350 बिलियन यूरो तक पहुँचने का अनुमान है। भारतीय संदर्भ में स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में पहल, परिवहन, स्मार्ट ग्रिड, स्वास्थ्य सेवाएँ और स्मार्ट विनिर्माण और प्रक्रम नियंत्रण इसके प्रमुख प्रेरक तत्व होंगे।

पिछले पांच वर्षों में अलग-अलग तरीके से संबंधित क्षेत्रों में की गई पहल को ध्यान में रखते हुए सीरी ने नियंत्रण प्रणालियों, संरचनात्मक स्वास्थ्य मॉनिटरन, कृषि-इलेट्रॉनिकी और जल प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता हासिल की है। साइबर-भौतिक प्रणालियों के इस क्षेत्र में केंद्रित प्रयास सीएसआईआर-सीरी को लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और अत्याधुनिक पहल के माध्यम से उद्योगों को बदलने एवं स्वयं को नई सूचना तथा संचार क्रांति में प्रबल भागीदार बनाने के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित कर सकता है। स्मार्ट सेंसर डिलीवर करने की क्षमता इस क्षेत्र में विकास के लिए अनुपूरक एवं सहायक सिद्ध होगी।